बैंक का अर्थ| बैंक की कितनी परिभाषाएं हैं?| बैंक क्या है, बैंक के प्रकार | बैंकिंग क्या है और इसका इतिहास क्या है? | प्राचीन काल तथा मध्‍यकाल में बैंकिंग व्‍यवसाय पर संक्ष्प्ति वर्णन | प्राचीन भारतीय बैंकिंग व्यवस्था | भारत में बैंकों का राष्ट्रीयकरण कब हुआ था| बैंक प्रबंधन समिति क्या है? |


बैंक का अर्थ| 

बैंक की कितनी परिभाषाएं हैं?| 

बैंक क्या है, बैंक के प्रकार  | 

बैंकिंग क्या है और इसका इतिहास क्या है? | 

प्राचीन काल तथा मध्‍यकाल में बैंकिंग व्‍यवसाय पर संक्ष्प्ति वर्णन | 

प्राचीन भारतीय बैंकिंग व्यवस्था | 

भारत में बैंकों का राष्ट्रीयकरण कब हुआ था|  

बैंक प्रबंधन समिति क्या है? |



बैंकिंग क्या है और इसका इतिहास क्या है?

प्राचीन काल तथा मध्‍यकाल में बैंकिंग व्‍यवसाय पर संक्ष्प्ति वर्णन

भारत में प्राचीन काल से ही किसी न किसी रूप में रूपयों का लेन देन होता था बौद्ध काल से ही कुछ ऐसी संस्‍थांए थी जो की व्‍यापारियों और विदेशों में जाने या घूमने के लिए उधार देते थे। प्राचीनकाल में कागज के नोट बिल या चेक आदि का प्रयोंग नही किया जाता था। बल्कि 12 वी शताब्‍दी से गाव में साहूकारों तथा बडे सेठों से रूपया को उधार लेने लगें। ये जो सेठ महाजन होते थे वह राजा महाराजाओं तथा मुगलो को भी आर्थि सहायता दिया करते थे। इन लोगों को जगत सेठ के नाम से जाने जाते थे। 

प्राचीन भारतीय बैंकिंग व्यवस्था

        भारत में सबसे पहले बैंक की स्‍थापना  सन 1881 में की गई थी जिसका नाम  अवध कॉमर्शियल बैंक था। उसके बाद फिर पंजाब नेशनल बैंक की स्‍थापना सन 1894 हुई थी। सन 1906 में स्‍वदेशी आंदोलन शुरू होने के कारण वाणिज्‍यक बैंकों की स्‍थापना को प्रोत्‍साहन मिला। वर्ष 1913 से 1917 के दौरान विभिन्न राज्यों में बैंकों का दिवालिया हो जाने से  बैंकों का नियमन और उन पर नियंत्रण की आवश्यकता को बल मिल गया। इस कारण अधिनियम बैंकिंग कंपनी अधिनियमन सन 1949 में पारित किया गया और इसके बाद बैंकिंग कंपनी नियमन अधिनियम 1949 के रूप में जाना जाने लगा। इस नियम के जरिए बैंकिंग व्यवस्था पर कानूनी नियमन अधिकार रिजर्व बैंक को मिल गया।
सन 1955 में देश के सबसे बड़े बैंक इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का राष्ट्रीयकरण किया गया इसका नाम बदलकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया कर दिया गया था और बाद में सन 1959 में किसके साथ सहयोगी बैंकों का गठन किया गया।


भारत में बैंकों का राष्ट्रीयकरण कब हुआ था?


समाज के दायित्व को देखते हुए केंद्र सरकार ने आर्थिक विकास की मुख्यधारा लाने के उद्देश्य 14 प्रमुख बैंकों का नियंत्रण अपने हाथ में लेने लगा।  14 जुलाई 1969 को यह आदेश जारी किया। 15 अप्रैल सन 1980 को अन्य बैंकों का भी राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।

बैंक प्रबंधन समिति क्या है?

आठवें दशक के अंत में कुछ ऐसी अनियमित व्यवस्था पाई गई जो सरकार को लगा कि इन्हें दूर किया जाना चाहिए ताकि वित्तीय व्यवस्था  और अर्थव्यवस्था को बनाने में  भूमिका निभा सके। तदनुसार वित्तीय ढांचे संगठन कामकाज और ऐसी सभी प्रक्रिया की जांच के लिए 14 अगस्त सन 1991 को श्री एम नरसिंहम की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया। यह समिति सिफारिशों के आधार पर सन 1993 में बैंकों में हो रहे गड़बड़ी को सुधार के लिए बनाई गई थी।

बैंक का अर्थ

बैंक शब्द इटालियन भाषा के बैंकों (Banco) से बना है वह फ्रेंच भाषा के बैंके (Banke) से बदला हुआ अंग्रेजी भाषा में बैंक (Bank)  हो गया। बैंक एक ऐसा संस्था है जिसमें लोगों को धन को अपने पास रखता है और आवश्यकता पड़ने पर वह उनका धन वापस कर देता है। यह संस्था सभी लोगों के लिए एक समान होती है। बैंक अपने ग्राहकों को विभिन्न प्रकार की सुविधा देती है जैसे चेक ड्राफ्ट एटीएम नेट बैंकिंग मोबाइल बैंकिंग आदि।

बैंक की कितनी परिभाषाएं हैं?

प्रो. सेयर्स के शब्‍दों के अनुसार - 
बैंक वह संस्‍था है जिसके ऋणों को अन्‍य व्‍यक्तियों के आपसी ऋणों के भुगतान के लिए विस्‍तृत रूप से स्‍वीकार किया जाता है । 

किनले के अनुसार -
बैंक एक ऐसा संगठन है जो सुरक्षित ढंग से ऐसे लोगों को धन उधार देता है जिन्‍हे उसकी आवश्‍यकता होती है और जिनके पास लोग अपनी वह रकम जमा करते है जो उनके उपयोग न हो ।  

बैंक क्या है, बैंक के प्रकार

भारत में निम्‍न प्रकार के बैंक पाये जाते हे -
   

1. व्‍यापारिक बैंक 
    यह एक ऐसा बैंक होता है जो व्‍यापार एवं उद्योग के लिए कम समय के लिए ऋण  प्रदान करती है । ये बैंक लोगों से जमाओं के रूप में नकदी प्राप्‍त करती है ।  यह बैंक लोगों के बचत को प्रोत्साहित करता है छोटे और बड़े व्यापारियों तथा उद्योगपतियों की जरूरतों को पूरी करता है।

2 औद्योगिक बैंक
वह बैंक होते हैं जो उद्योग और धंधा के लिए लंबे समय तक रुपेश संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं इसके अलावा यह बैंक अंशु एवं ऋण पत्रों का अभिगोपन भी करते हैं। 
IDBI Bank, IFCI bank, SFC Bank, ICICI Bank  आदि औद्योगिक बैंक के रूप में कार्य कर रहे हैं।

3. विदेशी विनिमय बैंक 
यह बैंक विदेशी व्यापार की व्यवस्था करते हैं इन बैंकों का मुख्य कार्य विदेशी विनिमय की अर्थव्यवस्था को करना है यह बैंक विदेशी व्यापार के लिए उधार धन देने सलाह लेने विदेशी बिलों का भुगतान क्रय-विक्रय करने तथा आयात निर्यात की व्यवस्था करने का कार्य करते हैं।

4 सहकारी बैंक
सहकारी बैंक सहकारी समिति को कहते हैं जो 10 या 10 से अधिक व्यक्तियों के द्वारा आपस में मिलकर बनाई जाती है आज इसका मुख्य उद्देश्य यह होता है कि आवश्यकता पड़ने पर सदस्यों को अल्पकालिक या मध्यकालीन ऋण देना होता है भारत में तीन प्रकार के सहकारी समितियां पाई जाती हैं 
I प्राथमिक सहकारी समितियां (ग्राम स्तर पर)
II केंद्रीय सहकारी समितियां (राज्य स्तर पर)
III जिला सहकारी बैंक समितियां।(जिला स्तर पर)

5 केंद्रीय बैंक
यह बैंक देश की संपूर्ण बैंकिंग व्यवस्था का शीर्षक होता है यह अन्य बैंकों से अलग होता है इसका मुख्य कार्य है देश के अंदर बैंकिंग प्रणाली को सुव्यवस्था सहित रूप से संचालित करना तथा देश के अन्य बैंकों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना केंद्रीय बैंक देश की आवश्यकता अनुसार पत्र मुद्रा का भी निर्गमन करता है और देश की साख एवं बैंकिंग व्यवस्था का भी नियंत्रण करता है।




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